गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

नही मिला इंसाफ तो छोड़ दुंगी इस्लाम

"यूपी : मुस्लिम महिला का एलान "नहीं मिला इन्साफ तो छोड़ दूंगी इस्लाम, अपना लुंगी सनातन धर्म" Dainik Bharat 13 Apr. 2017 12:21 इमरान खान मुस्लिम औरतों के साथ क्या होता है ये खबर देख आप सब कुछ समझ जाओगे.मुस्लिम औरत दरवाजे पर जाकर जोर से रोटी हुई ममी दरवाजा खोलो में र... -अगर जाधव को फांसी हुई तो मोदी पाकिस्तान को अफगानिस्तान का तोरा बोरा बना देगा : इमरान खानमुस्लिम औरतों के साथ क्या होता है ये खबर देख आप सब कुछ समझ जाओगे.मुस्लिम औरत दरवाजे पर जाकर जोर से रोटी हुई ममी दरवाजा खोलो में रिहाना यहा रहने आई हूँ.मुस्लिम महिला ने अपने ससुराल के घर पर जाकर आवाज लगाई तो वहां बहुत सारी भीड़ जमा हो गयी.जब आवाज लगाने पर भी घर का दरवाजा नहीं खुला तो मुस्लिम महिला अपनी पांच saal की बेटी और अपने परिवार वालों के साथ बाहर ही बैठ जाती है.मुस्लिम महिला के हक के लिए हिंदूवादी संगठन आगे आये.तीन तलाक का मुद्दा होने की वजह से वहां मामला और संगीन हो गया और मुस्लिम महिला ने भी एलान कर दिया इंसाफ नहीं मिला तो अपना लुंगी हिन्दू धर्म.आपकी जानकारी के लिए बता दें की ये मामला भी तीन तलाक से जुड़ा हुआ हाउ और युप के बुलंदशहर के सिकंदराबाद तहसील का है.लड़की के पिता मास्टर सगीर की बेटी रिहाना की शादी जमालपुर हमदर्द नगर निवासी मोहम्मद शरीफ एडवोकेट से 2012 में हुई थी।शादी में 30 लाख खर्च किए गए थेउस मुस्लिम महिला को उसके पति ने तंग किया और उसे घर से निकाल दिया.लड़की के घर वाले लड़की को लेकर ससुराल वालों के वहां गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ लड़के वालों ने दरवाजा नहीं खोला.बहुत शर्म की बात है मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी सच में ही नर्क भरी है मुस्लिम धर्म के ठेकेदार अब कुछ नहीं बोलेंगे आखिर सब कुछ मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ ही क्यों ?देर शाम रिहाना के पक्ष में अखिल भारत ¨हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक पांडेय भी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंच गए। रिहाना को संत व महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडेय के पास ले जाया गया।-मीट की दुकान बंद कर दूध बेचने लगा ये मुसलमान, पहले से करने लगा कई गुना अधिक कमाईमीडिया से बातचीत करते हुए हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि रिहाना काफी घबराई हुई है। उसने कहा कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह ¨हदू धर्म भी स्वीकार कर लेगी। हमारी पूरी कोशिश की जाएगी कि रेहाना को उसका परिवार मिल जाए। उसका शोषण नहीं होने देंगे।" - यूपी : मुस्लिम महिला का एलान "नहीं मिला इन्साफ तो छोड़ दूंगी इस्लाम, अपना लुंगी सनातन धर्म" http://tz.ucweb.com/4_13zsX

इन जातियों को मिलेगा आरक्षण

"HC के आदेश पर अब योगीराज में इन जातियों को मिलेगा आरक्षण Punajbkesari.in 13 Apr. 2017 13:36 इलाहाबादः हाईकोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में अब 2 जातियों 'भर' और 'राजभर' को अलग से आरक्षण दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है। जिसके चलते घुमंतू जाति की श्रेणी में आने वाले लोगों की योगी सरकार अलग से व्यवस्था करेगी। इनके लिए अलग सूची तैयार होगी और ये आदिवासी जाति उसी तरह की व्यवस्था का लाभ पा सकेंगे। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में घुमंतू व अर्द्ध घुमंतू जाति के लोगों को संविधान की नियमावली के तहत व्यवस्था देने को कहा है। अब सूबे की योगी सरकार को 6 महीने के अंदर ही इस पर फैसला लेना है कि वो इन जाति के लोगों को आरक्षण की कैसी और कौन-सी सूची में रखती है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई सूबे में भर व राजभर जाति को पिछड़ी जाति की सूची में रखा जाता है। इस बाबत इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई कि भर व राजभर पिछड़ी जाति को गैर अधिसूचित आदिवासी जाति की सूची में शामिल किया जाए। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने योगी सरकार को आदेश दिया कि वो 6 महीने में नियमानुसार व्यवस्था स्थापित करे। अब इन जाति के लोगों को राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी को अर्जी देने पर आगे की कार्रवाई पूरी हो सकेगी।" - HC के आदेश पर अब योगीराज में इन जातियों को मिलेगा आरक्षण http://tz.ucweb.com/4_11Eau

भारत के १० ऐसे राज्य

"भारत के 10 ऐसे राज्य जहां गाय काटने पर नहीं है कोई प्रतिबंध Azab Gazab 13 Apr. 2017 15:40 लंबे समय से ये सरकार का ये मुद्दा चला आ रहा है कि हिंदु धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है, इसलिए गौ हत्या को बंद किया जाना चाहिए. उत्तर प्रदेश में भी योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही उन्होंने अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने का बीड़ा उठा लिया है, इसके साथ ही गौवंश हत्या को रोकने का भी काम कर रहे हैं. Image: Farmer Junction कई ऐसे राज्य हैं जहां गायों को काटने पर आपको कड़ी से कड़ी सजा हो सकती है वहीं कुछ ऐसे भी राज्य हैं जहां गाय काटने पर आशिंक रूप से प्रतिबंध लगा है. लेकिन आज भी भारत के 10 ऐसे राज्य हैं जहां गायों को काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. यहां खुलेआम गाय और भैंस का मीट बिकता है और लोग इसे खरीद कर खाते हैं. तो आइए आपको बताते हैं कि राज्यों में है गाय काटने पर प्रतिबंध और किन राज्यों में गाय काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं है… पूरी तरह से प्रतिबंधित राज्य Image: Inbound Yoga गौवंश हत्या का मतलब है कि गाय, बैल, बछड़े और सांड किसी की भी हत्या नहीं की जा सकती है. ये नियम 11 राज्यों में लागू है जिसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और दो केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और चंडीगढ़ शामिल हैं. हरियाणा में गाय काटने पर एक लाख का जुर्माना और 10 साल की कैद की सजा है जबकि महाराष्ट्र में 10 हजार रुपये और 5 साल की सजा का प्रावधान है. इन राज्यों में गाय काटने पर नहीं है कोई प्रतिबंध Image: Breakway Back Packers भारत के इन दस राज्यों में गाय को काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. इन राज्यों में केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और एक केंद्र शासित राज्य लक्षद्वीप भी शामिल है. यहां गाय, बछड़ा, बैल और भैंस का मीट खुलेआम बाजारों में बिकता है और खाया जाता है. इन 10 राज्यों में गौवंश को काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और न ही कोई कानून है. सबसे ज्यादा हैरानी आपको ये जानकर होगी कि इन 10 राज्यों में से 3 ऐसे राज्य भी हैं जहां भारतीय जनता पार्टी का राज है. इन राज्यों में असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर शामिल हैं." - भारत के 10 ऐसे राज्य जहां गाय काटने पर नहीं है कोई प्रतिबंध http://tz.ucweb.com/4_13yQQ

ममता की बोलती बंद

"ममता की बोलती बंद जब पूरे बंगाल में हथियारों से लैस होकर निकले आरएसएस वाले India Drifts 13 Apr. 2017 08:59 कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अब आरएसएस और बीजेपी ने अपनी पैठ बनाने की ठान ली है। बीते दिन रामनवमी के अवसर पर बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ता बंगाल की सड़कों पर कुछ ऐसे ही निकले। बुधवार के दिन बीजेपी और आरएसएस ने भगवा बाने के साथ हाथों में तलवारें लेकर और जय श्री राम के उद्घोष के साथ बाइक पर रैलियां निकालीं। पूरे प्रदेश में वीएचपी, बीजेपी और आरएसएस ने लगभग 150 से ज्‍यादा रैलियां निकालीं। इन रैलियों पर बीजेपी की ओर से कहा गया कि यह रैलियां पार्टी की हिंदुत्‍व वाली विचारधारा को मजबूत बनाने के लिए निकाली गईं। वहीं राज्‍य में सत्‍ता पर आसीन टीएमसी की ओर से कहा गया कि बीजेपी लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटना चाहती है। आपको बता दें कि इनमें से कई रैलियां ऐसे जिलों में भी निकलीं जहां सांप्रदायिक तनाव का इतिहास रहा है। रैली में शामिल लोग हाथों में तलवार, चाकू और डंडे लिए हुए थे। ये सभी लोग जय श्री राम के साथ जय बजरंग बली और हर हर महादेव का उद्घोष कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर पुलिस इन रैलियों को लेकर काफी आशंकित दिखी कि कहीं को सांप्रदायिक घटना न घट जाए। लेकिन पूरे राज्‍य से कहीं भी किसी तरह की हिंसा की कोई घटना की शिकायत नहीं आई। इन रैलियों में कुछ जगहों पर अयोध्‍या में मंदिर बनाने की कसम खाने की बात के पोस्‍टर भी लहराते हुए दिखे। संदर्भ पढ़ें" - ममता की बोलती बंद जब पूरे बंगाल में हथियारों से लैस होकर निकले आरएसएस वाले http://tz.ucweb.com/4_13ywI

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

भारत के PM मोदी## हनुमान की तरह काम करे राम से कभी नही पुछते थे हनुमान

पीएम मोदी ने मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में सांसदों से कहा कि वे हनुमान की तरह काम करें. आज हनुमान जयंती के मौके पर हनुमान की भक्ति के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'जिस तरह लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान जड़ी-बूटी लेने चले गए, उसी तरह आप किसी निर्देश का इंतज़ार न करें. खुद से आगे बढ़ कर काम करें. सरकार के कामकाज को जनता तक ले जाएं.' सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा, 'सांसद अपने क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएं. मोदी की जय-जयकार ही क्यों हो, सांसद की जय-जयकार क्यों नहीं हो.' पीएम ने ये भी कहा कि पूरे रामायण में हनुमान ने कभी भी भगवान राम से सवाल नहीं पूछा, हमेशा उनके चरणों में रहे शीश झुकाये रहे. सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने मीटिंग में सांसदों से कहा कि हनुमान की भूमिका में सभी आ जाएं. जिस तरह हनुमान ने कभी कुछ लिया नहीं, सिर्फ दिया उसी तरह जनता के बीच जाकर देने का काम करें. बैठक में पीएम मोदी के भाषण के बारे में बीजेपी नेता अनंत कुमार ने कहा, 'पीएम ने हनुमान जयंती पर हम सबको बधाई दी. उन्होंने हनुमान को भक्ति और शक्ति की प्रेरणा बताया. उcmन्होंने बजट सत्र को सार्थक बताया. उन्होंने लोकसभा में 21 और राज्यसभा में 14 बिल पारित होने पर सबको बधाई दी. यूपी की जीत का जिक्र कर पीएम ने कहा कि एनडीए और बीजेपी के प्रति देश में सकारात्मक माहौल है, विकास के लिए स्वर्णिम अवसर है. इस अवसर पर वेंकैया नायडू ने बताया कि पार्टी के तीन साल पूरे होने पर क्या-क्या कार्यक्रम किए जा सकते हैं.

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

2 लाख लगाकर शुरु करें मोती की खेती, इन्कम 1 लाख रु महीने

अगर आप छोटी सी लागत से लाखों कमाना चाहते हैं, तो आपके लिए मोती की खेती एक बेहतर विकल्‍प हो सकती है। मोती की मांग इन दिनों घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट में काफी अधिक है, इसलिए इसके अच्‍छे दाम भी मिल रहे हैं। आप महज 2 लाख रुपए के निवेश से इससे करीब डेढ़ साल में हर महीने 1 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि कैसे करें मोती की खेती से कमाई... 20 हजार रुपए से शुरू हो सकती है खेती - मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है। यहां भी आपको सीप से ही मोती बनाना है। मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है। इसके लिए आपको 500 वर्गफीट का तालाब बनाना होगा। - तालाब में आप 100 सीप पालकर मोती उत्‍पादन शुरू कर सकते हैं। प्रत्‍येक सीप की बाजार में कीमत 15 से 25 रुपए होती है। इसके लिए स्‍ट्रक्‍चर सेट-अप पर खर्च होंगे 10 से 12 हजार रुपए, वाटर ट्रीटमेंट पर 1000 रुपए और 1000 रुपए के आपको इंस्‍ट्रयूमेंट्स खरीदने होंगे। लाखों में हो सकती है कमाई - 15 से 20 महीने बाद एक सीप से एक मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है। बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक इंटरनेशनल मार्केट में मिल जाती है। इस तरह अगर एक मोती की औसत कीमत आप 800 रुपए भी मानते हैं तो इस अवधि में 80,000 रुपए तक कमा सकते हैं। - सीप की संख्‍या आप बढ़ाकर अपने संसाधनों के आधार पर कर सकते हैं। मसलन अगर 2000 सीप पालते हैं तो इस पर खर्च करीब 2 लाख रुपए आएगा। इस हिसाब से आप 15 से 20 महीने की फार्मिंग पर हर महीने आप 1 लाख रुपए से ज्यादा कमा सकते हैं। बशर्ते आपकी मोती बेहतर क्‍वालिटी की हो। बीज डालने के लिए करनी होती है सीप की सर्जरी - सबसे पहले आपको इस खेती के लिए कुशल वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण की आवश्‍यकता होती है जो भारत सरकार के द्वारा कराया जाता है। प्रशिक्षण के बाद आपको सरकारी संस्‍थानों या मछुआरों से सीप खरीदने होंगे। सीपों को खुले पानी में दो दिन के लिए छोड़ा जाता है। इससे उनके उपर का कवच और मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं। सीपों को ज्‍यादा देर तक पानी से बाहर नहीं रखना चाहिए। - मांसपेशियां ढीली होने के बाद सीपों की सर्जरी कर उनकी सतह पर 2 से 3 एमएम का छेद करके उसमें रेत का एक छोटा कण डाला जाता है। यह रेत का कण जब सीप को चुभता है तो वह उस पर अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोड़ना शुरू कर देता है। सीपों को नायलॉन के बैग में रखकर (एक बैग में 2 से 3) तालाब में बांस या पीवीसी के पाईप के सहारे छोड़ दिया जाता है। 15 से 20 महीने बाद सीप में मोती तैयार हो जाता है आप उसका कवच तोड़कर मोती निकाल सकते हैं। ग्लोबल स्तर पर है डिजाइनर मोती की डिमांड - आमतौर मोती गोल होता है लेकिन, खेती के जरिए आप मोती को डिजाइन में भी बना सकते हैं जिसकी कीमत ज्‍यादा होती है। सीप के अंदर किसी भी आकृति (गणेश, ईसा, क्रॉस, फूल, आदि) का फ्रेम डाल देते हैं, पूरी प्रक्रिया के बाद मोती यही रूप लेता है। देश विदेश में इस प्रकार के मोतियों की बहुत अधिक मांग है और यह साधारण मोती से कई गुना अधिक कीमत पर बिकते हैं। एक मोती की कीमत 2000 रुपए से 15 हजार रुपए तक हो सकती है, बशर्ते उसकी क्‍वालिटी अच्‍छी हो। सरकार कराती है ट्रेनिंग - मोती की खेती देश में बहुत पहले से की जाती रही है, लेकिन करीब 4 दशक पहले यह बिल्‍कुल न के बराबर हो गई थी। इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च के तहत एक नए विंग सीफा यानि सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर इसके लिए निशुल्‍क ट्रेनिंग कराती है। इसका मुख्‍यालय भुवनेश्‍वर में है और यह 15 दिनों की ट्रेनिंग देता है, जिसमें सर्जरी समेत सभी कुछ सिखाया जाता है। मोती की खेती पहले समुद्र तटीय क्षेत्रों में की जाती थी लेकिन सीफा के प्रयोगों के बाद अन्‍य राज्‍य भी इसके लिए मुफीद हैं। मिलता है आसान लोन - मोती की खेती का यदि आपके पास प्रशिक्षण है तो इसे बड़े स्‍तर पर शुरू करने के लिए आप लोन भी ले सकते हैं। इसके लिए नाबार्ड और अन्‍य कमर्शियल बैंक आपको 15 सालों के लिए सिंपल इंटरेस्‍ट पर लोन उपलब्‍ध कराते हैं। केंद्र सरकार की ओर से इस पर सब्सिडी की योजनाएं भी समय-समय पर चलाई जाती हैं। यदि आप इसमें कामयाब हो जाते हैं तो अपने बिजनेस को बढ़ाकर कंपनी भी बना सकते हैं और कमाई करोड़ों में कर सकते हैं। खुद बेच सकते हैं अपने मोतियों को - खेती के बाद उत्‍पाद को बेचना ही सबसे बड़ी बात होती है, लेकिन मोतियों के बारे में ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं। कई बड़ी कं‍पनियों के एजेंट देशभर में फैले होते हैं जो मोती उत्‍पादकों के संपर्क में आ जाते हैं। इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं। - इंडियन पर्ल कंपनी देश की सबसे बड़ी मोती व्‍यापार करने और प्राइवेट तौर पर ट्रेनिंग देने वाली कंपनी है। इस कंपनी या इसके जैसी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं। 20 हजार करोड़ का है मार्केट - पूरी दुनिया में इस तरह के मोतियों का कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का है। भारत में बड़ी मात्रा में मोती पैदा किए जाते हैं लेकिन, फिर भी इसे इम्पोर्ट भी किया जाता है। भारत हर साल करीब 50 करोड़ रुपए से अधिक के मोती इम्पोर्ट करता है। लेकिन, जहां तक एक्‍सपोर्ट की बात है तो मोतियों का एक्‍सपोर्ट भी भारत से 100 करोड़ रुपए से अधिक का है। भारत से डिजाइनर मोतियों का ज्‍यादा एक्‍सपोर्ट होता है इसलिए आप अपने को इस तरफ भी मोड़ सकते हैं।" - http://tz.ucweb.com/4_Q3Xq

तिसरे युद्ध की तरफ बढ़ रही है दुनिया जाने कौन देश किसके साथ

सीरिया में केमिकल हमले के बाद दुनिया की दो महाशक्तियां फिर आमने-सामने है. सीरिया की असद सरकार के बचाव के लिए रूस ने अपना एक जंगी पोत भी सीरिया भेज दिया है. वहीं अमरीका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने सीरिया में विद्रोही ठिकानों पर हुए रासायनिक हमले के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि रूस इस बात पर सहमत हुआ था कि वह आश्वस्त करेगा कि सीरिया के रासायनिक हथियारों का ज़ख़ीरा खत्म हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दुनिया की इन दो बड़ी शक्तियों के आमने-सामने आ जाने के बाद ये कयास लग रहे हैं कि क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर है. अगर ऐसी स्थिति आती है तो कौन देश किसके साथ होगा ये सवाल भी कौंध रहा है. अमेरिका के साथ कौन-कौन से देश? सीरिया में जब 6 साल पहले अरब स्प्रिंग के प्रभाव में विद्रोह शुरू हुए थे तभी से अमेरिका असद विरोधी समूहों के पक्ष में खड़ा हो गया था. अरब का मामला है तो उसके पक्ष में सबसे पहले खड़ा दिखता है इस्राइल. इसके अलावा नैटो के सहयोदी देश- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देश अमेरिका के साथ हर अंतरराष्ट्रीय मामले पर साथ दिखते हैं. वहीं सीरिया का पड़ोसी देश तुर्की पहले से ही अमेरिका के साथ है. सीरिया बॉर्डर पर रूसी विमान के मार गिराने के कारण रूस के तुर्की का तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है. अमेरिका के सहयोगी ग्रुप-7 के सदस्य देशों के विदेश मंत्री इटली में मुलाकात कर रहे हैं. इस मीटिंग में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि रूसी सरकार पर सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद से दूरी बनाने का दबाव किस तरह बनाया जाए. ब्रिटेन- ब्रिटेन की सरकार ने अमेरिकी हमले का पूरा समर्थन किया है. ब्रितानी रक्षा मंत्री माइकल फैलन ने अमरीकी कार्रवाई को सही और सीमित बताया. तुर्की तुर्की के राष्ट्रपति तैयप अर्दोआन ने अमरीकी कार्रवाई को सीरिया में हो रहे कथित युद्ध अपराध का सही जवाब बताया है. इस्राइल- इस्राइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने एक बयान जारी कर अमरीकी कार्रवाई का पूरा समर्थन किया. फ्रांस- फ्रांस वैसे अमेरिका के साथ खड़ा दिखता है लेकिन सीरिया में इसकी स्थिति पशोपेश वाली है. पेरिस में हुए आतंकी हमलों के बाद फ्रांस के युद्धक विमानों ने सीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर बमबारी की थी लेकिन रूस के साथ तनाव की स्थिति में फ्रांस अमेरिका के साथ ही खड़ा होगा. सऊदी अरब- अमेरिका की ही तरह सुन्नी बहुल खाड़ी देश सऊदी अरब भी किसी भी कीमत पर असद को हटाने पर अड़ा है. 2013 में जब असद पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा था तब सऊदी अरब चाहता था कि अमेरिका हस्तक्षेप करे. अमेरिका द्वारा ऐसा न करने पर सऊदी अरब नाराज था, हालांकि अब ये देश अमेरिका के नेतृत्व में आईएसआईएस के खिलाफ अभियान में शामिल है. रूसी खेमे में कौन-कौन से देश शामिल रूस, ईरान और सीरिया की सरकार अगले अमरीकी हवाई हमले की स्थिति में जवाब देने की मुद्रा में दिख रही है. अमेरिका बीते हफ्ते सीरिया के एयरबेस पर हमला कर चुका है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने एक भाषण में सीरियाई राष्ट्रपति को तानाशाह तक कह चुके हैं. सीरियाई सरकार के मुख्य सैन्य सहयोगी रूस ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली और मनगढ़ंत आधार पर की गई आक्रामक कार्रवाई बताया. रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने अमरीका और रूस के पहले से खस्ताहाल संबंधों के गंभीर रूप से बिगड़ने की चेतावनी दी. हालांकि, रूस की संसद ड्यूमा ने संकेत दिए हैं कि अमरीकी कार्रवाई के बाद रूस अपने हमले तेज़ नहीं करेगा. ईरान- सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थक ईरान ने अमरीकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. इन देशों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं चीन चीनी सरकार ने सीरिया में बिगड़ते हालात पर चिंता जताई है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि किसी देश, संस्था, व्यक्ति की तरफ़ से किसी भी हालत में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का चीन विरोध करता है लेकिन सबसे ज़रूरी है कि सीरिया की हालत को और न बिगड़ने दिया जाए. भारत भारत ने सीरिया मामले पर कोई स्पष्ट रुख तो नहीं दिखाया है क्योंकि अमेरिका के साथ भी भारत के अच्छे रिश्ते हैं और रूस सबसे अहम सहयोगी है. वहीं सीरिया के साथ भी भारत के परंपरागत संबंध रहे हैं. हालांकि, भारत ने सीरिया, लीबिया जैसे देशों में अपने नागरिकों के जाने पर ट्रैवल एजवाइजरी जारी की है. भारत अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के काल में भी तटस्थता की नीति को अपनाता रहा और किसी भी गुट में शामिल नहीं हुआ था.