रविवार, 23 अप्रैल 2017

मिल गया जबाव कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा

"आखिर मिल ही गया जवाब-कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था? Aajtak 23 Apr. 2017 17:28 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा' इस सवाल का जवाब मिल गया है. जी हां, बाहुबली फैंस के लिए खुशखबरी है. फिल्म की स्टार कास्ट ने खुद इस सवाल का जवाब दे दिया है. बाहुबली फैंस न जाने कब से इस सवाल का जवाब जानने के लिए तरस रहे हैं और फिल्म की रिलीज होने तक का इंतजार भी बड़ी मुश्किल से कर रहे हैं. 'बाहुबली' को दो पार्ट में बनाने की वजह का हुआ खुलासा एक यू-ट्यूब चैनल 'रिक्शावाली' की होस्ट ने भी इस सवाल का जवाब जानना चाहा और इसीलिए वह फिल्म बाहुबली के कलाकारों और बाकी क्रू मेंबर्स के साथ टच में थीं, लेकिन फिल्म की कास्ट को देखकर यही लगा कि वे इस सवाल के बारे में कुछ भी बोलने के मूड में हैं. जब इस बारे में बाहुबली प्रभास से बात की गई तो उन्होंने इसका एक अलग ही जवाब दिया जिसको सुनकर किसी को भी हंसी आ जाएगी. इसके बाद, यू-ट्यूब चैनल रिक्शावाली की होस्ट ने इस सवाल को फिर से पूछने की हिम्मत नहीं की. सुरक्षा के घेरे में 'बाहुबली', कहीं खुल न जाए कटप्पा का राज वीडियो में होस्ट ने फिल्म के कलाकारों से यही सवाल किया कि 'आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा', जिसका सबसे फनी जवाब दिया अनुष्का शेट्टी ने. फिल्म में बाहुबली की पत्नी का रोल कर रही अनुष्का ने तो कटप्पा को ही पहचाने से इनकार कर दिया. वहीं भल्लाल देव यानी एक्टर राणा दुग्गुबाती ने इस सवाल के जवाब में रिक्शावाली होस्ट के सामने तलवार ही निकाल ली और उन्हें धमकी तक दे डाली. फिल्म बाहुबली के प्रेंजेंटर के राघवेंदर राव का तो मानना है कि बाहुबली जिंदा है तो कटप्पा कैसे बाहुबली को मार सकता है. हिट हुआ 'बाहुबली 2' का प्रोमो सॉन्ग, अब तक 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा लेकिन सबसे फनी जवाब तो रिक्शावाली को मिला है फिल्म बाहुबली में बाहुबली का किरदार निभा रहे एक्टर प्रभास से. प्रभास का मानना है कि फैंस को इस सवाल का जवाब बाहुबली पार्ट 3 में मिलेगा. हैरान रह गए ना आप भी. मतलब अब दर्शकों को बाहुबली 3 का इंतजार करना होगा. खैर यह तो फैंस को फिल्म बाहुबली 2 की रिलीज के बाद ही पता लगेगा कि उन्हें उनके सबसे बड़े सवाल 'आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा' का जवाब मिलता है या नहीं या फिर उनके फेवरेट एक्टर प्रभास सही कह रहे थे. तब तक फैंस को 28 अप्रैल का बस थोड़ा सा और इंतजार करना पड़ेगा." - आखिर मिल ही गया जवाब-कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था? http://tz.ucweb.com/4_1QMY5

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

भोजपुरी सिनेमा का सफर

"भोजपुरी सिनेमाः न भोजपुर का, न मुंबई का Sarita 21 Apr. 2017 12:45 भोजपुरी सिनेमा ने भले ही 5 दशक से ज्यादा का सफर पूरा कर लिया है लेकिन उसके खाते में 10-12 बेहतरीन फिल्में भी नहीं है. हर साल 50 से ज्यादा भोजपुरी फिल्में बन रही हैं लेकिन हिन्दी फिल्मों की अंधी नकल की वजह से वह न तो प्योर भोजपुरी रह पाती है और न ही पूरी तरह से मुंबईया फिल्में ही बन पाती हैं. हिंदी फिल्मों की घटिया नकल कर भोजपुरी फिल्मकारों ने भोजपुरी फिल्मों का यह हाल कर दिया है कि उसमें भोजपुरी बोली के अलावा कुछ भी भोजपुरी नहीं रह गया है. इसे भोजपुरी फिल्मकारों का दिमागी दिवालियापन ही कहा जाएगा कि वे भोजपुरी फिल्मों का नाम तक हिंदी में ही रखने लगे हैं. पहली भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मइया तोहरे पियरी चढ़इबो’ थी, जो 5 फरवरी 1962 में रीलीज हुई थी. 5 लाख रूपए में बनी उस फिल्म ने 75 लाख रूपए की कमाई की थी. विश्वनाथ प्रसाद शहाबादी की बनाई उस फिल्म को मिली भारी कामयाबी के बाद तो भोजपुरी सिनेमा का रास्ता ही खुल गया और धड़ाधड़ एक के बाद एक भोजपुरी फिल्में बनने लगीं. “संईया से भइल मिलनवा”, “तुलसी सोहे तोहार अंगना”, “सोलहो सिंगार करे दुलहनिया”, “बिदेसिया”, “पान खाए सैंया हमार”, “लागी नहीं छूटे राम” जैसी कई फिल्में सामने आई और भोजपुरी सिनेमा को नई ताकत मिली. बाद में यह हाल हुआ कि भोजपुरी सिनेमा माई, गंगा, भौजी, संईया, देवर आदि के नामों और किरदारों में उलझ कर रह गई. इससे आगे की सोच न होने की वजह से 1970 के आते-आते भोजपुरी सिनेमा की गाड़ी पूरी तरह से लड़खड़ा गई. साल 1977 में हिन्दी सिनेमा के खलनायक रहे सुजीत कुमार और वैंप एवं छोटे-मोटे रोल करने वाली प्रेमा नारायण भोजपुरी फिल्म “दंगल” में हीरो-हीरोइन बन कर आए. ‘दंगल’ भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म थी. ‘दंगल’ के गाना ‘गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा जियरा हिल हिल जाए..’ ने तो धमाल ही मचा दिया. उस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने आवाज दी थी. उसके बाद राकेश पांडे और पदमा खन्ना की जोड़ी ‘बलम परदेसिया’ लेकर आई, जिसने कामयाबी के झंडे गाड़ डाले. उसके बाद “धरती मैया”, “दूल्हा गंगा पार के”, “दगाबाज बलमा”, “संईया मगन पहलवानी में”, “हमार दूल्हा” जैसी बीसियों भोजपुरी फिल्में बनीं पर कोई खास धमाल नहीं पैदा कर सकीं. उसके बाद एक बार फिर भोजपुरी फिल्म इंडस्ड्री ‘कोमा’ में चली गई. ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ साल 2003 में आई और उसने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर जान डाल दी. बिहार के भोजपुरी गायक मनोज तिवारी और रानी चटर्जी की इस फिल्म को मिली कामयाबी ने भोजपुरी सिनेमा के पर्दे को फिर से चमकदार बना दिया. उसके बाद तो एक बार फिर भोजपुरी फिल्मों की झड़ी लग गई. फिल्म वितरक विनोद पांडे कहते हैं कि भोजुपरी सिनेमा की बढ़ती लोकप्रियता का ही नतीजा था कि अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, जैकी श्रापफ, शत्रुघ्न सिन्हा, जितेंद्र, रति अग्निहोत्री, नगमा, भाग्यश्री, भूमिका चावला जैसे बॉलीवुड के कलाकारों ने इसमें काम किया. इतना ही नहीं भोजपुरी सिनेमा ने कुणाल सिंह, राकेश पांडे, मनोज तिवारी, रवि किशन, दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’, सुदीप पांडे, पवन सिंह, राकेश मिश्रा, खेसारीलाल, पाखी हेगड़े, रानी चटर्जी, मोनालिसा, श्वेता तिवारी, दिव्या देसाई, रिंकू घोष जैसे कई कलाकारों ने खूब दौलत और शोहरत कमाई. भोजपुरी फिल्मों के वितरक विनोद पांडे कहते हैं कि हिंदी सिनेमा की कोरी नकल, फूहड़ डायलॉग और गीतों ने भोजपुरी सिनेमा का बहुत कबाड़ा किया है. इस वजह से ज्यादातर लोग परिवार के साथ फिल्म देखने से कतराते हैं. भोजपुरी फिल्में बनाने और उससे जुड़े लोगों का वहीं घिसा-पिटा तर्क है कि जो दर्शक देखना चाहता है, वही वे परोसते हैं. हीरो रवि किशन कहते हैं कि भोजपुरी सिनेमा के पॉजिटिव चीजों को देखा जाना चाहिए. लोग अपनी सोच और बाजार के हिसाब से फिल्में बनाते हैं. एक बार जो चीज चल गई उसे ही कामयाबी की गारंटी मान लेना फिल्मकारों की बहुत पुरानी बीमारी है. जो करोड़ों रूपए खर्च कर फिल्म बनाएगा वह कमाई का ख्याल तो रखेगा ही. पब्लिक की पसंद के हिसाब से फिल्में बनती है. भोजपुरी फिल्मों की वजह से ही बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के सैंकड़ों सिनेमा हॉल बंद होने से बच गए. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भले ही कुछ भी दावे कर लें पर यह सच है कि भोजपुरी सिनेमा को वह दर्जा नहीं मिल सका है, जो तमिल, तेलगू, मलयाली, बंगला, कन्नड़, मराठी फिल्मों को हासिल हो चुका है. भोजपुरी फिल्मों के नामी विलेन उदय श्रीवास्तव कहते हैं कि इस इंडस्ट्री में बाहरी लोगों के घुसने से भोजपुरी फिल्मों की पहचान खत्म हो गई है. साउथ के लोग इसलिए भोजपुरी फिल्म बनाने लगे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे काफी ज्यादा कमाई है. वैसे लोगों को भोजपुरी की माटी की खूबी, उसकी संस्कृति और पहचान आदि से कोई लेना देना नहीं होता है. वह यही समझते हैं कि केवल भोजपुरी बोली में फिल्म बना देने से वह भोजपुरी फिल्म हो जाती है. आज के भोजपुरी फिल्मों में हिंसा और खून-खराबा की भरमार होने से औरतें ऐसी फिल्मों से कट चुकी हैं, जिससे फिल्में चल नहीं पाती हैं. भारत समेत मॉरीसश, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिनाड आदि देशों में करीब 25 करोड़ लोग भोजपुरी बोलने-समझने वाले हैं. देश में बिहार और उत्तर प्रदेश में भोजपुरी बोलने वाले सबसे ज्यादा है. महाराष्ट्र, पंजाब, चंडीगढ़, गुजरात आदि राज्य भी भोजपुरी सिनेमा के बड़े बाजार हैं क्योंकि बिहार और उत्तरप्रदेश के हजारो-लाखों लोग वहां के कल-कारखानों में काम करते हैं. भोजपुरी सिनेमा के हीरो राजीव मिश्रा कहते हैं कि परदेश में अपनी बोली की फिल्म देख कर लोग अपने गांव की मिट्टी की खूबी जैसा आनंद लेते हैं. इसी वजह से दूसरे राज्यों में भी भोजपुरी फिल्में काफी चलती हैं. वहीं मिटटी की खूबी आज की भोजपुरी फिल्मों से पूरी तरह से गायब हो चुकी है और उसकी जगह पूरी तरह से मुंबईया फिल्मों के स्टाइल ने ले ली है. हिंदी वाले भी अंग्रेजी टॉयटल क्यों रखते हैं: राकेश मिश्रा भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार राकेश मिश्रा भोजपुरी फिल्मों के हिन्दी टॉयटल रखने के चलन के बारे में कहते हैं कि इसमें कोई खराबी नहीं है. साउथ के कई हिट फिल्में हिन्दी में बन रही है और ढेरों मुंबईया फिल्मों के नाम अंग्रजी में रखे जाते हैं. फिल्म बनाने वाला और फायनेंसर यही चाहता है कि किसी भी तरह से उसकी फिल्में हिट हो और उन्हें मुनाफा मिल सके. इसके लिए वह हर हथकंडा अपनाता है. राकेश का दावा है कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री ने खूब तरक्की की है और आज भी उसकी कामयाबी का सफर जारी है. कई फिल्मों के ओवर बजट होने की वजह से इंडस्ट्री को थोड़ा झटका लगा था पर अब सब कुछ पटरी पर लौट आया है. हर इंडस्ट्री में कामयाबी के बाद उठा-पटक और बदलाव का दौर आता है. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री नई तकनीक और पुरानी परंपरा के बीच छटपटा रही है और जल्द ही इसमें भी बदलाव दिखाई देगा." - भोजपुरी सिनेमाः न भोजपुर का, न मुंबई का http://tz.ucweb.com/4_1F2Qq

रविवार, 16 अप्रैल 2017

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शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

भीम एप

"युवाओं को मोदी ने बताया- कैसे BHIM ऐप डाउनलोड कराकर कमा सकते हैं पैसे Aajtak 14 Apr. 2017 15:11 पीएम मोदी ने अंबेडकर जयंती के मौके पर Bhim Aadhaar लॉन्च किया है. इसके साथ ही रेफरल प्रोग्राम की भी शुरुआत की है. पीएम के मुताबिक इस रेफरल प्रोग्राम से अगर देश के युवा चाहें तो 10 से 15 हजार रुपये तक कमा सकते हैं. क्या है रेफरल स्कीम आपको इस स्कीम के तहत जिन लोगों ने BHIM ऐप अपने स्मार्टफोन में नहीं डाउनलोड किया है उन्हें इसे इंस्टॉल कराना है. यानी किसी को भीम ऐप के बारे में किसी मर्चेंट या नागरिक को समझाएंगे और उसे डाउनलोड कराएंगे. अगर आपके रेफरल से उसने ऐप डाउनलोड कर लिया है और इसके बाद और वो तीन ट्रांजैक्शन करेगा, तो सरकार आपके खाते में 10 रुपये जमा करेगी. पीएम मोदी ने कहा, 'अगर एक दिन में आप 20 लोगों को रेफर कर दें तो शाम तक 200 रुपये आपके खाते में आ जाएंगे. अगर तीन महीने तय कर लें कि रोज 200 कमाना है तो ये क्या मुश्किल काम है? व्यापारियों को भी मिलेगा रेफरल का फायदा ये रेफरल प्रोग्राम न सिर्फ कस्टमर्स के लिए है, बल्कि मर्चेंट्स के लिए भी फायदेमंद है. पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा है कि जो व्यापारी अपने दुकान पर भीम ऐप लागू करेगा और उसके जरिए ट्रांजैक्शन करेगा तो 25 रुपये उसके खाते में दिए जाएंगे. पीएम मोदी ने कहा कि अगर किसी मर्चेंट को BHIM ऐप डाउनलोड करा रहे हैं तो आप उसे यह बता सकते हैं कि उसे भी 25 रुपये मिलेंगे." - युवाओं को मोदी ने बताया- कैसे BHIM ऐप डाउनलोड कराकर कमा सकते हैं पैसे http://tz.ucweb.com/4_19rj0

मुस्लिम महिला ने अपनाया हिन्दू धर्ू

"पति ने फोन पर दिया तलाक, मुस्लिम महिला ने अपनाया हिन्दू धर्म, हर हर मोदी गाया India TV News Desk 14 Apr 2017 10:21 Triple Talaq नई दिल्ली: ट्रिपल तलाक का मुस्लिम महिलाएं अब मुखर विरोध कर रही हैं। ऐसा ही एक मामला बिजनौर में सामने आया जब एक मुस्लिम महिला को उसके पति ने फोन पर ही तलाक दे दिया। जिसके बाद महिला ने हिंदू धर्म अपना लिया। महिला ने साथ ही पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई है। महिला को उसके पति ने कतर से ही फोन पर तलाक दे दिया था। पीड़िता का नाम अरीबा खान है उसकी शादी 11 अप्रैल 2012 को बिजनौर के नहटौर में महमूद इशहाक के साथ हुई थी। महमूद कतर में सिविल इंजिनियर है। शादी के बाद से ही ससुराल में उसे परेशान किया जाने लगा। एक साल बाद उसके एक बेटी हुई। काफी मनाने और जिद करने पर उसका पति मां बेटी को कतर ले गया। सात-आठ महीने वहां रखा। उसके बाद अपनी नौकरी छूटने की बात कहकर उन्हें और बेटी को बिजनौर छोड़ गया। कुछ दिन बिजनौर में साथ रहने पर दिल्ली और मुंबई में नौकरी की तलाश का बहाना कर फिर से कतर चला गया। इसी दौरान 9 अप्रैल 2015 को कतर से ही टेलिफोन पर उसे तलाक दे दिया। अरीबा का कहना है कि रिश्ता बनाकर रखने की काफी कोशिश की लेकिन पति नहीं माने। मजबूर होकर उसने नहटौर थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। तभी से न्याय के लिए वह लड़ रही हैं। उसका कहना है कि तीन तलाक का मुद्दा खत्म करने के पीएम मोदी के भरोसे देने के बाद उसने बीजेपी को वोट किया था। अब केंद्र और प्रदेश में सरकार बीजेपी की है, इस क्रूरतम ट्रिपल तलाक के मुद्दे को खत्म किया जना चाहिए।" - पति ने फोन पर दिया तलाक, मुस्लिम महिला ने अपनाया हिन्दू धर्म http://tz.ucweb.com/4_19mg5

गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

नही मिला इंसाफ तो छोड़ दुंगी इस्लाम

"यूपी : मुस्लिम महिला का एलान "नहीं मिला इन्साफ तो छोड़ दूंगी इस्लाम, अपना लुंगी सनातन धर्म" Dainik Bharat 13 Apr. 2017 12:21 इमरान खान मुस्लिम औरतों के साथ क्या होता है ये खबर देख आप सब कुछ समझ जाओगे.मुस्लिम औरत दरवाजे पर जाकर जोर से रोटी हुई ममी दरवाजा खोलो में र... -अगर जाधव को फांसी हुई तो मोदी पाकिस्तान को अफगानिस्तान का तोरा बोरा बना देगा : इमरान खानमुस्लिम औरतों के साथ क्या होता है ये खबर देख आप सब कुछ समझ जाओगे.मुस्लिम औरत दरवाजे पर जाकर जोर से रोटी हुई ममी दरवाजा खोलो में रिहाना यहा रहने आई हूँ.मुस्लिम महिला ने अपने ससुराल के घर पर जाकर आवाज लगाई तो वहां बहुत सारी भीड़ जमा हो गयी.जब आवाज लगाने पर भी घर का दरवाजा नहीं खुला तो मुस्लिम महिला अपनी पांच saal की बेटी और अपने परिवार वालों के साथ बाहर ही बैठ जाती है.मुस्लिम महिला के हक के लिए हिंदूवादी संगठन आगे आये.तीन तलाक का मुद्दा होने की वजह से वहां मामला और संगीन हो गया और मुस्लिम महिला ने भी एलान कर दिया इंसाफ नहीं मिला तो अपना लुंगी हिन्दू धर्म.आपकी जानकारी के लिए बता दें की ये मामला भी तीन तलाक से जुड़ा हुआ हाउ और युप के बुलंदशहर के सिकंदराबाद तहसील का है.लड़की के पिता मास्टर सगीर की बेटी रिहाना की शादी जमालपुर हमदर्द नगर निवासी मोहम्मद शरीफ एडवोकेट से 2012 में हुई थी।शादी में 30 लाख खर्च किए गए थेउस मुस्लिम महिला को उसके पति ने तंग किया और उसे घर से निकाल दिया.लड़की के घर वाले लड़की को लेकर ससुराल वालों के वहां गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ लड़के वालों ने दरवाजा नहीं खोला.बहुत शर्म की बात है मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी सच में ही नर्क भरी है मुस्लिम धर्म के ठेकेदार अब कुछ नहीं बोलेंगे आखिर सब कुछ मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ ही क्यों ?देर शाम रिहाना के पक्ष में अखिल भारत ¨हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक पांडेय भी कार्यकर्ताओं के साथ पहुंच गए। रिहाना को संत व महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडेय के पास ले जाया गया।-मीट की दुकान बंद कर दूध बेचने लगा ये मुसलमान, पहले से करने लगा कई गुना अधिक कमाईमीडिया से बातचीत करते हुए हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि रिहाना काफी घबराई हुई है। उसने कहा कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह ¨हदू धर्म भी स्वीकार कर लेगी। हमारी पूरी कोशिश की जाएगी कि रेहाना को उसका परिवार मिल जाए। उसका शोषण नहीं होने देंगे।" - यूपी : मुस्लिम महिला का एलान "नहीं मिला इन्साफ तो छोड़ दूंगी इस्लाम, अपना लुंगी सनातन धर्म" http://tz.ucweb.com/4_13zsX

इन जातियों को मिलेगा आरक्षण

"HC के आदेश पर अब योगीराज में इन जातियों को मिलेगा आरक्षण Punajbkesari.in 13 Apr. 2017 13:36 इलाहाबादः हाईकोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में अब 2 जातियों 'भर' और 'राजभर' को अलग से आरक्षण दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है। जिसके चलते घुमंतू जाति की श्रेणी में आने वाले लोगों की योगी सरकार अलग से व्यवस्था करेगी। इनके लिए अलग सूची तैयार होगी और ये आदिवासी जाति उसी तरह की व्यवस्था का लाभ पा सकेंगे। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में घुमंतू व अर्द्ध घुमंतू जाति के लोगों को संविधान की नियमावली के तहत व्यवस्था देने को कहा है। अब सूबे की योगी सरकार को 6 महीने के अंदर ही इस पर फैसला लेना है कि वो इन जाति के लोगों को आरक्षण की कैसी और कौन-सी सूची में रखती है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई सूबे में भर व राजभर जाति को पिछड़ी जाति की सूची में रखा जाता है। इस बाबत इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई कि भर व राजभर पिछड़ी जाति को गैर अधिसूचित आदिवासी जाति की सूची में शामिल किया जाए। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने योगी सरकार को आदेश दिया कि वो 6 महीने में नियमानुसार व्यवस्था स्थापित करे। अब इन जाति के लोगों को राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी को अर्जी देने पर आगे की कार्रवाई पूरी हो सकेगी।" - HC के आदेश पर अब योगीराज में इन जातियों को मिलेगा आरक्षण http://tz.ucweb.com/4_11Eau